36 गुण मिलान: हर गुण कहाँ से आता है

36 में से अंक, आठ हिस्सों में बँटा हुआ, हर हिस्सा एक आसान वाक्य में।

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36 गुण मिलान

36 गुण आठ कूटों का जोड़ हैं: 1 + 2 + 3 + 4 + 5 + 6 + 7 + 8। भारी कूट, नाड़ी, भकूट और गण, मिलकर 36 में से 21 गुण रखते हैं, इसलिए कुल अंक पर इनका असर सबसे ज़्यादा है।

ऊँचा अंक अच्छा लगता है और कम अंक समझने लायक है, पर कोई भी आपके लिए फैसला नहीं करता। यह टूल हिस्से, अपवाद और, जन्म समय न हो तो, अंक की संभावित सीमा दिखाता है।

36 गुण कैसे जुड़ते हैं

आठ कूट, हर एक का भार पिछले से थोड़ा अधिक। आठों कूट इस पर टिके हैं कि आप दोनों के जन्म के समय चंद्रमा कहाँ था।

कूटक्या देखता हैगुण
वर्णसोच और काम करने का ढंग1
वश्यआपसी खिंचाव, और कब कौन आगे रहे2
ताराजन्म नक्षत्रों की गिनती से कुशलता और समय3
योनिशारीरिक और स्वाभाविक सहजता4
ग्रह मैत्रीचंद्र राशि स्वामियों की मित्रता: मानसिक तालमेल5
गणस्वभाव: देव, मनुष्य या राक्षस6
भकूटचंद्र राशियों की दूरी: परिवार और धन7
नाड़ीप्रकृति; सबसे अधिक भार वाला कूट8

मंगल दोष, शांति से

मंगल दोष का अर्थ है कुंडली में मंगल का पहले, दूसरे, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में होना। यह बारह में से छह भाव हैं, इसलिए लगभग आधे लोगों की कुंडली में यह होता है।

शास्त्र इसके परिहार भी बताते हैं: दोनों की कुंडली में होना, मंगल का अपनी राशि में या उच्च का होना, गुरु का साथ या दृष्टि, और कई राशि और भाव के मेल। यह टूल इन्हें जाँचता है और जो लागू हो उसका नाम बताता है। यह ध्यान से देखने का कारण है, फैसला कभी नहीं।

लोग अक्सर पूछते हैं

क्या 36 में से 18 गुण अच्छे हैं?

18 वह रेखा है जिसे कई परिवार मानते हैं, पर कुल से ज़्यादा उसके हिस्से मायने रखते हैं। पूरी नाड़ी और भकूट वाले 18 और दोनों में 0 वाले 18 का अर्थ बहुत अलग है, इसलिए यह टूल हर कूट समझाता है।

कितने गुण मिलने चाहिए?

कई परिवार 36 में से 18 या अधिक गुण देखते हैं। हम कोई पास होने की रेखा नहीं रखते: एक ही कुल अंक के पीछे पूरी नाड़ी भी हो सकती है और शून्य भी, इसलिए यह टूल हर कूट का अर्थ और परंपरा के अपवाद दिखाता है।

क्या जन्म समय के बिना कुंडली मिलान हो सकता है?

हाँ। कूट चंद्रमा के नक्षत्र पर टिके हैं, जो लगभग एक दिन में बदलता है। समय न होने पर हम जन्म के पूरे दिन चंद्रमा को देखते हैं, अंक की संभावित सीमा दिखाते हैं और बताते हैं कि कौन से कूट कम निश्चित हैं।

मंगल दोष क्या है, क्या चिंता करनी चाहिए?

इसका अर्थ है मंगल का पहले, दूसरे, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में होना, जो लगभग आधी कुंडलियों में होता है। शास्त्र इसके कई परिहार बताते हैं, जैसे दोनों की कुंडली में होना; यह टूल इन्हें जाँचकर समझाता है। यह ध्यान से देखने का कारण है, फैसला कभी नहीं।

क्या आप मेरी लिखी जानकारी सहेजते हैं?

नहीं। मुफ़्त मिलान गणना करके आपको दिखाया जाता है; कुछ भी सहेजा नहीं जाता। साझा करने पर लिंक में सिर्फ़ पहले नाम और अंक रहते हैं, जन्म विवरण कभी नहीं, और वह 30 दिन बाद बंद हो जाता है।

विस्तृत मिलान रिपोर्ट में क्या है?

दोनों कुंडलियाँ साथ-साथ, आप दोनों के शुक्र, मंगल, गुरु और सातवाँ भाव, नवांश, और आठों कूट, हिंदी, अंग्रेज़ी या मराठी में PDF के रूप में।