पाटणा पंचांग, रविवार, 3 ऑक्टोबर, 2027
पाटणा साठी, एका सूर्योदयापासून पुढच्या सूर्योदयापर्यंतची गणना.
पंचांगाची पाच अंगे
| तिथी | शुक्ल चतुर्थी 01:29 (दुसऱ्या दिवशी) पर्यंतनंतर शुक्ल पंचमी 01:37 (दुसऱ्या दिवशी) पर्यंत |
|---|---|
| नक्षत्र | विशाखा 00:00 (दुसऱ्या दिवशी) पर्यंतनंतर अनुराधा 00:44 (दुसऱ्या दिवशी) पर्यंत |
| योग | विष्कंभ 13:44 पर्यंतनंतर प्रीती 12:24 (दुसऱ्या दिवशी) पर्यंत |
| करण | वणिज 13:43 पर्यंतनंतर विष्टी (भद्रा) 01:29 (दुसऱ्या दिवशी) पर्यंत; नंतर बव 13:26 (दुसऱ्या दिवशी) पर्यंत |
| वार | रविवार |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
| मास | आश्विन (अमांत) |
| संवत | विक्रम 2084 · शके 1949 |
सूर्य आणि चंद्र
| सूर्योदय | 05:42 |
|---|---|
| सूर्यास्त | 17:35 |
| चंद्रोदय | 08:50 |
| चंद्रास्त | 19:38 |
| सूर्य राशी | कन्या |
| चंद्र राशी | तूळ |
दिवसाच्या वेळा
| अभिजित मुहूर्त | 11:15 ते 12:02 |
|---|---|
| राहुकाळ | 16:06 ते 17:35 |
| यमगंड | 11:38 ते 13:08 |
| गुलिक काळ | 14:37 ते 16:06 |
राहुकाळ, यमगंड आणि गुलिक हे परंपरेनुसार नव्या सुरुवातीसाठी कमी अनुकूल मानले जातात. अभिजित परंपरेनुसार शुभ मानला जातो.
स्विस एफेमेरिस, लाहिरी अयनांश. सूर्योदय: सूर्याची वरची कड, अपवर्तनासह. मास अमांत, पौर्णिमांत सोबत.
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