कोलकाता पंचांग, बुधवार, 17 मार्च, 2027
कोलकाता साठी, एका सूर्योदयापासून पुढच्या सूर्योदयापर्यंतची गणना.
पंचांगाची पाच अंगे
| तिथी | शुक्ल नवमी 06:44 पर्यंतनंतर शुक्ल दशमी 04:22 (दुसऱ्या दिवशी) पर्यंत; नंतर शुक्ल एकादशी 01:52 (दुसऱ्या दिवशी) पर्यंत |
|---|---|
| नक्षत्र | आर्द्रा 06:46 पर्यंतनंतर पुनर्वसु 05:07 (दुसऱ्या दिवशी) पर्यंत; नंतर पुष्य 03:21 (दुसऱ्या दिवशी) पर्यंत |
| योग | सौभाग्य 08:53 पर्यंतनंतर शोभन 05:47 (दुसऱ्या दिवशी) पर्यंत |
| करण | कौलव 06:44 पर्यंतनंतर तैतिल 17:34 पर्यंत; नंतर गरज 04:22 (दुसऱ्या दिवशी) पर्यंत; नंतर वणिज 15:08 (दुसऱ्या दिवशी) पर्यंत |
| वार | बुधवार |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
| मास | फाल्गुन (अमांत) |
| संवत | विक्रम 2083 · शके 1948 |
सूर्य आणि चंद्र
| सूर्योदय | 05:44 |
|---|---|
| सूर्यास्त | 17:47 |
| चंद्रोदय | 12:32 |
| चंद्रास्त | 01:36 |
| सूर्य राशी | मीन |
| चंद्र राशी | मिथुन |
दिवसाच्या वेळा
| अभिजित मुहूर्त | 11:21 ते 12:09अनेक पंचांगे बुधवारी अभिजित धरत नाहीत. |
|---|---|
| राहुकाळ | 11:45 ते 13:16 |
| यमगंड | 07:14 ते 08:45 |
| गुलिक काळ | 10:15 ते 11:45 |
राहुकाळ, यमगंड आणि गुलिक हे परंपरेनुसार नव्या सुरुवातीसाठी कमी अनुकूल मानले जातात. अभिजित परंपरेनुसार शुभ मानला जातो.
स्विस एफेमेरिस, लाहिरी अयनांश. सूर्योदय: सूर्याची वरची कड, अपवर्तनासह. मास अमांत, पौर्णिमांत सोबत.
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