जयपुर का पंचांग, सोमवार, 15 नवंबर 2027
जयपुर के लिए, एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक की गणना।
पंचांग के पाँच अंग
| तिथि | कृष्ण प्रतिपदा 07:29 तकफिर कृष्ण द्वितीया 05:42 (अगले दिन) तक; फिर कृष्ण तृतीया 03:42 (अगले दिन) तक |
|---|---|
| नक्षत्र | कृत्तिका 07:06 तकफिर रोहिणी 06:01 (अगले दिन) तक; फिर मृगशिरा 04:42 (अगले दिन) तक |
| योग | परिघ 15:21 तकफिर शिव 12:39 (अगले दिन) तक |
| करण | कौलव 07:29 तकफिर तैतिल 18:37 तक; फिर गर 05:42 (अगले दिन) तक; फिर वणिज 16:43 (अगले दिन) तक |
| वार | सोमवार |
| पक्ष | कृष्ण पक्ष |
| मास | कार्तिक (अमांत)मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत) |
| संवत | विक्रम 2084 · शक 1949 |
सूर्य और चंद्रमा
| सूर्योदय | 06:46 |
|---|---|
| सूर्यास्त | 17:36 |
| चंद्रोदय | 18:27 |
| चंद्रास्त | 07:54 |
| सूर्य राशि | तुला |
| चंद्र राशि | वृषभ |
दिन के समय
| अभिजीत मुहूर्त | 11:50 से 12:33 तक |
|---|---|
| राहुकाल | 08:07 से 09:29 तक |
| यमगंड | 10:50 से 12:11 तक |
| गुलिक काल | 13:33 से 14:54 तक |
राहुकाल, यमगंड और गुलिक को परंपरा से नई शुरुआत के लिए कम अनुकूल माना जाता है। अभिजीत को परंपरा से शुभ माना जाता है।
स्विस एफ़ेमेरिस, लाहिरी अयनांश। सूर्योदय: सूर्य का ऊपरी किनारा, अपवर्तन सहित। मास अमांत, पूर्णिमांत साथ में।
आज का दिन आपके लिए क्या कहता है?
आपकी कुंडली इस पंचांग को आपका दिन बनाती है: आपका चंद्रमा, आपकी दशा, आपके गोचर।
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